नेपाल में कितने समय तक किसके पास रहेगी पीएम की कुर्सी, इस पर डील कर रहे हैं पीएम प्रचंड

Michael John
By -

नेपाल (Nepal) में एकबार फिर से राजनीतिक उठापटक जारी है। यहां पर प्रधानमंत्री पुष्‍प कमल दहल (Pushp Kamal Dahal Prachanda) की पार्टी सीपीएन की नेपाली कांग्रेस और यूनिफाइड सोशलिस्‍ट के बीच एक डील को लेकर बातचीत जारी है। इस डील के तहत यह तय हो सकेगा कि देश में सरकार किस तरह से चलेगी और किस पार्टी की पीएम लीड करेगा।

 

काठमांडू: नेपाल में पिछले दिनों देश की सबसे बड़ी पार्टी को संसद में राष्‍ट्रपति की पद की पेशकश की गई है। इस घटना के बाद तीन पार्टियों नेपाल कांग्रेस, सीपीएन (माओवादी) सीपीएन (यूनिफाइड सोशलिस्‍ट) की तरफ से अब सत्‍ता का बंटवारा कैसे हो, इस पर चर्चा जारी है। जो डील इन पार्टियों के बीच होगी उसमें इस पर भी फैसला होगा कि कितने समय के लिए किस पार्टी के नेता को पीएम का पद दिया जाएगा। इन सबके बीच नेपाल के प्रधानमंत्री पुष्‍क कमल दहल प्रचंड ने राजनीतिक अस्थिरता को देखते हुए अपना कतर दौरा कैंसिल करने का ऐलान कर दिया है।


बारी-बारी से चलेगी देश की सरकार

काठमांडू पोस्‍ट की एक रिपोर्ट के मुताबक तीन दलों ने बारी-बारी से सरकार चलाने का फैसला किया है। इन पार्टियों की समझ अगर अगले चुनाव तक बरकरार रहती है तो फिर संविधान के मुताबिक संसद के मौजूदा पांच साल के सत्र में कम से कम तीन सरकारें होंगी। इन तीनों पार्टियों के टॉप लीडर्स जिसमें माओवादी सेंटर के प्रधानमंत्री पुष्प कमल दहल, नेपाली कांग्रेस के अध्यक्ष शेर बहादुर देउबा, और सीपीएन (यूनिफाइड सोशलिस्ट) के अध्यक्ष माधव कुमार नेपाल- के बीच पीएम पद को रोटेट करने पर एक अनौपचारिक डील पहले से ही है।

Read Also : Hоw TikTok Hаѕ Bent Itѕ Rules Fоr Itѕ Tор Creators

अभी तक कुछ साफ नहीं

मगर पार्टी के सूत्रों की मानें तो इस बारे में अभी कुछ भी स्‍पष्‍ट नहीं है कि कैसे उनकी पार्टी को सरकार के नेतृत्‍व का मौका मिलेगा। पीएम के मुख्‍य सलाहकार हरीबोल गुजराल की मानें तो तीनों नेता इस बात पर रजामंद हुए हैं कि बारी-बारी से सरकार चलने का मौका मिलेगा। लेकिन अभी एक आपसी निष्‍कर्ष पर पहुंचना बाकी है। इसके तहत तय होगा कि कौन से नेता को कितने समय तक सरकार चलाने का मौका मिलेगा। वहीं, बाकी दलों के नेता अलग-अलग दावे कर रहे हैं। कुछ नेताओं की मानें तो तीनों दलों के बीच हुए समझौते के बारे में कुछ भी बताने के बारे में अभी मना किया गया है।


ओली ने वापस लिया समर्थन

जहां आठ पार्टियां कांग्रेस के राष्‍ट्रपति पद के उम्‍मीदवार राम चंद्र पौडेल का समर्थन कर रही हैं। वहीं, उपराष्ट्रपति पद के लिए जनता समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार का समर्थन करने पर रजामंदी बनी है। कुछ माओवादी केंद्र के नेताओं के मुताबक उनकी पार्टी ढाई साल तक सरकार को लीड करेगी जबकि कांग्रेस डेढ़ साल तक शासन करेगी। इस समझौते के अनुसार यूनिफाइड सोशलिस्‍ट नेपाल को सिर्फ एक साल तक की शासन का मौका मिल सकेगा। यूनिफाइड सोशलिस्‍ट पार्टी के नेताओं का दावा है कि दहल के डेढ़ साल बाद उनकी पार्टी की नेतृत्व का मौकामिलेगा। उन्हें भरोसा है कि दहल अपनी बात पर कायम रहेंगे।

इस उठापटक के बीच ही पूर्व प्रधानमंत्री के.पी. शर्मा ओली की पार्टी सीपीएन-यूएमएल ने प्रचंड सरकार से समर्थन वापस लेने का फैसला किया है।