हमारे सनातन वैदिक धर्म का मूल स्रोत वेद हैं। वेद चार हैं--ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद और अथर्व वेद। सतयुग में एक ही वेद था, अग्नि भी एक ही था।ऋग्वेद विश्व का प्राचीनतम ज्ञानकोष है। जब त्रेतायुग प्रारम्भ हुआ तब चंद्रवंशी राजा पुरुरवा के हृदय में तीनों वेद प्रकट हुए और राजा पुरुरवा ने अरणि मंथन किया तब जातवेदा नाम का अग्नि प्रकट हुआ उस जातवेदा अग्नि के द्वारा अग्नि त्रयी का प्राकट्य हुआ --1.आहवनीय 2.गार्हपत्याग्नि 3.दक्षिणअग्नि। इन तीनों अग्नियों को राजा पुरुरवा ने पुत्र रुप में स्वीकार किया। त्रेतायुग के प्रारंभ में अग्नि त्रयी और वेद त्रयी का प्राकट्य हुआ ॥ वेदों का अंग उपांग सहित अध्ययन करना आवश्यक है। वेद के चार भाग है --1.मंत्र भाग(संहिता), 2. ब्राह्मण ग्रंथ, 3.आरण्यक, 4. उपनिषद। आज के समय में हमारा वैदिक ज्ञान पूरा नही है, वेद मार्ग लुप्त हो रहा है। वर्तमान समय में वेद पूर्ण नही है, वेद की शाखायें नष्ट हो रही हैं॥ ऋग्वेद की 21 शाखायें थी परंतु वर्तमान समय में ऋग्वेद की 2 शाखायें उपलब्ध हैं ---ऐतरेय शाखा और वाष्कल शाखा। ऋग्वेद की 19 शाखायें नष्ट हो गयी हैं, ऋग्वेद के ब्राह्मण ग्रंथों का नाम है ऐतरेय ब्राह्मण और कौषीतकि ब्राह्मण। ऋग्वेद के उपनिषद का नाम है ऐतरेय उपनिषद। यह ऐतरेय उपनिषद ऋग्वेद की ऐतरेय शाखा से प्रकट हुआ है। यजुर्वेद 2 भागों में विभक्त है--कृष्ण यजुर्वेद और शुक्ल यजुर्वेद। यजुर्वेद की कुल 101 शाखायें थी, कृष्ण यजुर्वेद की 86 शाखायें और शुक्ल यजुर्वेद की 15 शाखायें। परंतु वर्तमान समय में कृष्ण यजुर्वेद की 84 शाखायें नष्ट हो चुकी हैं आधुनिक समय में कृष्ण यजुर्वेद की 2 शाखायें उपलब्ध हैं--1. कठ शाखा 2. तैत्तिरीय शाखा। कृष्ण यजुर्वेद के 2 उपनिषद हैं--1. कठ उपनिषद 2. तैत्तिरीय उपनिषद। कठोपनिषद कृष्ण यजुर्वेद की कठ शाखा से प्रकट हुआ है एवम तैत्तिरीय उपनिषद कृष्ण यजुर्वेद की तैत्तिरीय शाखा से प्रकट हुआ है। कृष्ण यजुर्वेद के ब्राह्मण ग्रंथों का नाम है -- तैत्तिरीय ब्राह्मण, मैत्रायणी ब्राह्मण, कठ ब्राह्मण और कपिष्ठल ब्राह्मण॥ शुक्ल यजुर्वेद की 13 शाखायें लुप्त हो चुकी हैं वर्तमान समय में शुक्ल यजुर्वेद की 2 शाखायें उपलब्ध हैं 1. काण्व शाखा 2. माध्यन्दिनि शाखा। शुक्ल यजुर्वेद के ब्राह्मण ग्रंथ का नाम है शतपथ ब्राह्मण और उपनिषद का नाम है ईशावास्य उपनिषद॥ सामवेद की एक हजार शाखायें थी परंतु सामवेद की 997 शाखायें नष्ट हो चुकी हैं वर्तमान समय में सामवेद की 3 शाखायें उपलब्ध हैं --1. रायायणी शाखा 2. जैमिनी शाखा 3. कौथुमी शाखा। सामवेद के ब्राह्मण ग्रंथों का नाम है--- प्रौढ़(पंच विंश) ब्राह्मण, षडविंश ब्राह्मण, आर्षेय ब्राह्मण, छान्दोग्य ब्राह्मण और जैमीनीय ब्राह्मण॥ सामवेद के 2 उपनिषद के नाम है छान्दोग्य उपनिषद और केनोपनिषद॥ अथर्व वेद की 9 शाखायें थी परंतु 7 शाखायें नष्ट हौ चुकी हैं वर्तमान समय में अथर्व वेद की 2 शाखायें उपलब्ध हैं 1. पिप्पलाद शाखा 2. शौनक शाखा। इसमे भी मात्र शौनक शाखा ही पूर्ण है पिप्पलाद शाखा अधूरी है। अथर्व वेद का ब्राह्मण ग्रंथ है गोपथ ब्राह्मण और 3 उपनिषद हैं--मुन्डक उपनिषद, मान्डुक्य उपनिषद और प्रश्न उपनिषद॥
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