भारतीय आयकर विभाग के छापों का चीनी मीडिया ने किया समर्थन, BBC को बताया ‘प्रोपेगेंडा मशीन’

Michael John
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ग्लोबल टाइम्स ने बीबीसी की पत्रकारिता-शैली पर सवाल उठाया है। इस आर्टिकल में कहा गया, “बीबीसी एक विशिष्ट पश्चिमी मीडिया आउटलेट है, जो तथ्य-आधारित होने का दावा करता है।


भारतीय आयकर विभाग की रेड के बीच चीनी मीडिया ने ब्रिटेन की प्रसारण कंपनी बीबीसी पर कटाक्ष किया है। चीन ने बीबीसी को एक प्रोपेगेंडा मशीन बताया है। इसमें यह भी कहा गया कि ब्रिटिश राजनेता बीबीसी का बचाव करते हैं और इस बात को नहीं मानते कि दूसरे देशों में यह बदनाम है। चीनी न्यूज पेपर ग्लोबल टाइम्स के आर्टिकल में कहा गया कि बीबीसी तथ्य-आधारित होने का दावा करता है, जबकि वह ओपिनियन जर्नलिज्म कर रहा है।

चीनी मीडिया ने बीबीसी पर छापों का किया समर्थन

ग्लोबल टाइम्स ने अपने ताजा ओपिनियन-एडिटोरियल पीस में बीबीसी पर जमकर हमला बोला है। इसमें फुडन यूनिवर्सिटी के रिसर्च फेलो सोंग लुझेंग ने बीबीसी को प्रोपेगेंडा मशीन बताया है। भारत में पिछले दिनों आयकर विभाग ने कर चोरी की जांच के तहत बीबीसी के दिल्ली और मुंबई स्थित मुख्यालय में छापेमारी की थी। इस बीच चीनी प्रमुख समाचार पत्र ग्लोबल टाइम्स में यह आर्टिकल आया है। वहीं, पीपुल्स डेली ने बीबीसी के खिलाफ भारत के आईटी छापे का समर्थन किया है।

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पत्रकारिता शैली पर उठाए सवाल

ग्लोबल टाइम्स ने बीबीसी की पत्रकारिता-शैली पर सवाल उठाया है। इस आर्टिकल में कहा गया, “बीबीसी एक विशिष्ट पश्चिमी मीडिया आउटलेट है, जो तथ्य-आधारित होने का दावा करता है। फिर भी यह तथ्यों पर बात करने के बजाय ओपिनियन जर्मनिज्म कर रहा है।” इसमें आगे कहा गया कि यह एक प्रोपेगेंडा मशीन है जो पश्चिमी साम्राज्यवाद के लिए काम करती है।

आगे ब्रिटेन पर हमला बोलते हुए ग्लोबल टाइम्स ने लिखा कि ब्रिटिश राजनेता बीबीसी का एक राष्ट्रीय खजाने के रूप में बचाव करते हैं। इसमें कहा गया कि ब्रिटेन इस तथ्य पर बात नहीं करना चाहता है कि यह दूसरे देशों में बदनाम है, वह इसे अनदेखा करता है।

अमेरिका और ब्रिटेन जैसे पश्चिमी देशों की आलोचना करते हुए, ग्लोबल टाइम्स ने कहा कि पश्चिम अपने मूल्यों को अपनाता है और उन्हें ही मानता है, जो उससे मेल नहीं खाता या उससे अलग है उन पर प्रतिबंध लगाता है। ग्लोबल टाइम्स ने अपने ऑप-एड में कहा कि पश्चिमी मीडिया में प्रोफेशनलिज्म की अनदेखी उनके अहंकार और वर्चस्ववादी मानसिकता को दर्शाती है। इसमें आगे कहा गया कि किसी देश के मीडिया की अंतरराष्ट्रीय स्थिति देश की ताकत और मीडिया नैतिकता के पालन से निर्धारित होती है।